बिहार की आर्थिक धमनियों में स्वरोजगार की एक नई लहर दौड़ रही है। राज्य का युवा अब केवल ‘जॉब सीकर’ की कतार में खड़ा नहीं रहना चाहता, बल्कि ‘जॉब क्रिएटर्स’ की जमात में शामिल होने के लिए बेताब है। एक वित्तीय पत्रकार के नजरिए से देखें तो किसी भी स्टार्ट-अप की सफलता और विफलता के बीच सबसे बड़ी दीवार ‘पूंजी की सुलभता’ (Access to Capital) होती है। इसी अवरोध को ढहाने के लिए बिहार सरकार की ‘मुख्यमंत्री उद्यमी योजना 2026’ एक सशक्त वित्तीय ब्लूप्रिंट के रूप में उभरी है। यह केवल एक सरकारी ऋण नहीं है, बल्कि जोखिम को कम करने और उद्यमशीलता को संस्थागत बनाने की एक सोची-समझी नीति है।

50% अनुदान: रिस्क मिटिगेशन का सबसे बड़ा साधन
इस योजना का सबसे क्रांतिकारी पहलू इसकी ‘सीड फंडिंग’ प्रकृति है। ₹10 लाख की कुल परियोजना लागत में से 50% राशि (अधिकतम ₹5 लाख) सरकार अनुदान (Grant) के रूप में देती है। वित्तीय भाषा में कहें तो, यह उद्यमी के ‘ब्रेक-ईवन पॉइंट’ तक पहुँचने के जोखिम को आधा कर देता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह अनुदान राशि सीधे ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के माध्यम से बैंक खाते में आती है, जो बिचौलियों की संभावना को समाप्त कर पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।
ब्याज मुक्त ऋण और एक वर्ष का मोरेटोरियम
पूंजी की लागत (Cost of Capital) अक्सर नए व्यवसायों का गला घोंट देती है, लेकिन यहाँ शर्तें बेहद उदार हैं:
- ब्याज मुक्त प्रावधान: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अति पिछड़ा वर्ग (EBC), महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए यह ऋण पूरी तरह ब्याज मुक्त है।
- युवा उद्यमी वर्ग: सामान्य और पिछड़ा वर्ग (BC-02) के पुरुषों के लिए मात्र 1% का नाममात्र ब्याज लागू है।
- चुकौती की शर्तें: उद्यमी को एक वर्ष का ‘मोरेटोरियम पीरियड’ (ऋण स्थगन अवधि) मिलता है। ऋण की वापसी दूसरी या तीसरी किस्त प्राप्त होने के एक वर्ष बाद शुरू होती है, जिसे 84 समान किस्तों (7 वर्ष) में चुकाया जा सकता है। यह लंबी अवधि शुरुआती नकदी प्रवाह (Cash Flow) के प्रबंधन में काफी सहायक सिद्ध होती है।
उद्योगों का स्मार्ट वर्गीकरण: बाजार की मांग के अनुसार चयन
सरकार ने रैंडम लोन बांटने के बजाय बाजार की ‘व्यवहार्यता’ (Feasibility) के आधार पर उद्योगों को तीन श्रेणियों में बांटा है। यह वर्गीकरण आवेदकों को यह समझने में मदद करता है कि वर्तमान बाजार में किन उत्पादों की मांग सबसे अधिक है:
| श्रेणी (Category) | कुल लक्ष्य (Slots) | प्रमुख परियोजनाएं | वित्तीय विश्लेषण/उद्देश्य |
| कैटेगरी A | 5000 | आटा/बेसन, बेकरी, स्टील फर्नीचर, होटल/रेस्टोरेंट | उच्च मांग/कम जोखिम: स्थानीय खपत आधारित उद्योग। |
| कैटेगरी B | 3500 | मखाना प्रोसेसिंग, रेडीमेड गारमेंट्स, दाल मिल | मध्यम जोखिम: मूल्य संवर्धन (Value Addition) पर जोर। |
| कैटेगरी C | 747 | एग्रीकल्चर ड्रोन, आईटी सेवाएं, सोलर लाइट असेंबलिंग | तकनीकी नवाचार: ‘न्यू बिहार’ के लिए आधुनिक सेवाएं। |
‘एग्रीकल्चर ड्रोन’ और तकनीकी सेवाओं का ‘फाइन प्रिंट’
योजना अब केवल पारंपरिक व्यवसायों तक सीमित नहीं है। कैटेगरी ‘C’ में शामिल ‘एग्रीकल्चर ड्रोन एज ए सर्विस’ और डिजिटल मार्केटिंग जैसी सेवाएं दर्शाती हैं कि बिहार का युवा तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहा है। हालांकि, तकनीकी परियोजनाओं के लिए पात्रता शर्तें सख्त हैं:
- मेडिकल चेक-अप सेंटर: इसके लिए आवेदन के साथ DMLT/BMLT प्रमाण-पत्र अपलोड करना अनिवार्य है।
- ई-व्हीकल असेंबली/बनाना फाइबर: इन विशिष्ट परियोजनाओं के लिए कार्य अनुभव का प्रमाण-पत्र आवश्यक है।

सामाजिक समावेशन: महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए विशेष प्रावधान
वर्ष 2025-26 की योजना में ‘मुख्यमंत्री दिव्यांगजन उद्यमी योजना’ के तहत 100 अतिरिक्त पदों का आवंटन किया गया है। इसके लिए UDID कार्ड और न्यूनतम 40% दिव्यांगता अनिवार्य है।
नीतिगत स्तर पर एक महत्वपूर्ण बारीकी महिलाओं के लिए है: महिला आवेदकों का जाति प्रमाण-पत्र उनके पिता के नाम से (Father’s Name) होना चाहिए, न कि पति के नाम से। यह एक तकनीकी बिंदु है जिसके कारण कई आवेदन निरस्त हो जाते हैं।
पारदर्शी चयन प्रक्रिया और ‘गैर-आवासीय’ प्रशिक्षण
चयन प्रक्रिया को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त रखने के लिए ‘कंप्यूटराइज्ड रैंडमाइजेशन’ (लॉटरी सिस्टम) का उपयोग किया जाता है। चयनित होने के बाद, सरकार उद्यमी को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करती है:
- 06 दिवसीय प्रशिक्षण: यह गैर-आवासीय (Non-Residential) प्रशिक्षण है।
- अनुशासन: प्रशिक्षण के लिए अधिकतम 02 अवसर दिए जाते हैं। दोनों बार अनुपस्थित रहने पर अभ्यर्थिता (Candidacy) तुरंत रद्द कर दी जाएगी।
महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन चेकलिस्ट
आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है और udyami.bihar.gov.in पोर्टल पर उपलब्ध है।
- आवेदन प्रारंभ: 25 फरवरी 2026 (अपराह्न 03:00 बजे)
- अंतिम तिथि: 15 मार्च 2026 (अपराह्न 05:00 बजे)
- आयु सीमा: 18 से 50 वर्ष (आधिकारिक निर्देशानुसार)।
दस्तावेजों की तैयारी:
- मैट्रिक प्रमाण-पत्र (जन्म तिथि हेतु)।
- इंटरमीडिएट/10+2/ITI/पॉलीटेक्निक डिप्लोमा।
- जाति प्रमाण-पत्र (महिलाओं के लिए पिता के नाम से)।
- स्थायी निवास प्रमाण-पत्र (बिहार का स्थायी निवासी होना अनिवार्य)।
- लाइव फोटो और स्कैन किए हुए हस्ताक्षर।
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट (पोर्टल पर उपलब्ध सूची से)।
निष्कर्ष: जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर तक का सफर
बिहार उद्यमी योजना 2026 केवल एक सब्सिडी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने का एक गंभीर प्रयास है। ₹5 लाख का अनुदान और ₹5 लाख का सुलभ ऋण एक ऐसा सुरक्षा चक्र प्रदान करता है, जिससे नए उद्यमी विफलता के डर के बिना अपनी विजनरी सोच को जमीन पर उतार सकें।
क्या आपके पास वह विजन और अनुशासन है जो बिहार की अगली बड़ी ‘सक्सेस स्टोरी’ बन सके? याद रहे, आवेदन की खिड़की 15 मार्च तक ही खुली है। अपने सपनों को एक औपचारिक व्यवसाय का रूप देने का इससे बेहतर अवसर नहीं हो सकता।