भारतीय संविधान के वो चौंकाने वाले मोड़: 6 सबसे प्रभावशाली और क्रांतिकारी संशोधन
क्या कोई संविधान पत्थर की लकीर है, जिसे समय की धूल कभी छू नहीं सकती? या फिर यह एक बढ़ते हुए राष्ट्र की धड़कनों की तरह जीवंत और गतिशील है? एक विधिक विशेषज्ञ के रूप में, मैं इसे ‘मूलभूत कानून के सिद्धांत’ (Theory of fundamental law) और ‘संसदीय संप्रभुता’ (Parliamentary sovereignty) के बीच एक उत्कृष्ट …